13 अप्रैल से पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े मेले का आगाज

-मेले में मीणा समाज के 3 लाख से अधिक लोग जुटते हैं।
-14 अप्रैल को सुबह 8 बजकर 40 मिनट पर निर्धारित समय गंगा वेरी में गंगा प्रकट होगी।
सिरोही। जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर अरावली की पहाडिय़ों से घिरे चोटिला गांव स्थित गौतम ऋषि महादेव मंदिर में 13 अप्रेल 2022 से मीणा समाज का वार्षिक मेला शुरू होगा। पश्चिमी राजस्थान का मीणा समाज का सबसे बड़ा यह मेला प्रबंधन, अनुशासन, सामाजिक एकजुटता और परंपरा की मिसाल और इनका अनूठा संगम है। वैसे हर साल इस मेले का आयोजन किया जाता है। लेकिन कोरोना संक्रमण दौरान 2 वर्ष से मेला आयोजित नही हुआ था। इस मेले की खासियत यह है कि यह हर समाज के लोगों को प्रबंधन, अनुशासन के साथ ही परंपराओं को निभाने का एक संदेश देता है। इस मेले में मीणा समाज के 3 लाख से अधिक लोग जुटते हैं व परिवार सहित तीन दिन तक यहां रूकते हैं। खास बात यह है कि लाखों की संख्या में जुटी भीड़ की व्यवस्था के लिए पुलिस की कोई जरूरत नहीं पड़ती। पूरा इंतजाम सिर्फ समाज के हाथों में होता है। नदी की रेत पर एताइयां यानी अस्थायी आवास बनाए जाते हैं। इन्हीं एताइयों पर परिवार के लोग शादी योग्य अपने बेटे-बेटियों के रिश्ते तय करते हैं। रिश्तेदारों की मनुहार होती है और कोई नाराजगी है तो वह दूर की जाती है। एकजुटता, मेले में समाज के सभी लोग एक समान, कोई बड़ा और छोटा नहीं इस मेले ने पूरे प्रदेश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। मेले के दौरान समाज के लोग अपने परिवार के साथ तीन दिन तक यहीं रहते हैं। यहां बड़े ओहदे का व्यक्ति भी समाज समाज की जाजम पर पंचों के साथ ही बैठता है उसके लिए अलग से अलग व्यवस्था नहीं होती। परंपरा, एताईयों पर जवाई व रिश्तेदारों के लिए मंगल गीत, बनते हैं नए रिश्ते समाज के लोग पने लडक़े-लड़कियों के रिश्ते करते हैं। परंपरा मेले की स्थापना से चली आ रही है। गौतम ऋषि महादेव के दर्शन के बाद चूरमा का भोग लगाते हैं। यहां प्रकट होने वाली गंगा में अस्थियां विसर्जित की जाती है। मन-मुटाव दूर होते हैं और एताइयों पर जवाईयों व रिश्तेदारों के स्वागत में महिलाएं मंगल गीत गाती है।

मान्यतानुसार गंगा वेरी में गंगा प्रकट होगी
14 अप्रेल 2022 को सुबह 8 बजकर 40 मिनट पर निर्धारित समय पर मान्यतानुसार गंगा वेरी में गंगा प्रकट होगी। जहां लोगों द्वारा अस्थियां विसर्जित की जाती है। समाज के लोगों द्वारा मंदिर में दर्शन कर परिवार के खुशहाली की कामना की जाती है। वहीं मेले में जाने वाले लोगों के रास्ते भर पानी, शर्बत व अन्य व्यवस्थाएं की गई है। 15 अप्रेल 2022 को दोपहर बाद लोग वापस लौटने लगेंगे। वही गौतम ऋषि ट्रस्ट मीणा समाज ग्यारह परगना अध्यक्ष उमाराम मीणा बिलर ने बताया
मेले की तमाम व्यवस्थाएं समाज के हाथों में होती है। समाज की परंपराए रीति रिवाज और अनुशासन यहां देखने को मिलता है। करीब 3 लाख से अधिक समाज बंधु यहां एक साथ जुटते हैं। मेला स्थल पर निगरानी के लिए सभी परगनों के करीब 500 कार्यकर्ताओं को लगाया गया है। नियम भी बनाएं गए है जिनकी पालना भी सभी करते हैं।

मेले में यह है प्रतिबंध
मेले में अनुशासन बना रहे इसके लिए समाज के पंचों ने नियम-कायदे बनाए है। महिला-पुरुष मुंह पर कपड़ा बांध कर नहीं घूम सकते। यहां तक हथियार लेकर मेले में आने, शराब पीने, ओरण भूमि से हरे पेड़ काटने, वीडियो शूटिंग व फोटोग्राफी करने तक पर प्रतिबंध है। 8 बजे के बाद महिलाओं के मेले में घूमने पर पाबंदी है।

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