जोखिम में बच्चें, बेफ्रिक अभिभावक

हितेन्द्रसिंह चौहान। सिरोही मिरर-सिरोही जिले में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के निजी स्कूलों के अनफिट वाहन खुलेआम सड़को पर दौड़ते नजर आते है। ऐसे में इन पर कार्रवाही होना किसी बड़ी घटना के बाद ही संभव है। हमेशा किसी घटना के बाद ही प्रशासन क्यों जागता है पहले से ही उचित कार्रवाही कर ली जाए तो करौली व जैसलमेर जैसी दिल दहलाने वाली घटना को रोका जा सकता है। लेकिन स्थानीय जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, परिवहन व पुलिस विभाग ने तो यह ठान ही लिया है कि हम घटना होने के बाद ही जागेंगे। जिसके कारण निजी स्कूलों की मनमानी दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है।
सिरोही मिरर ने जिम्मेदारी से निभाई अपनी भूमिका
सिरोही मिरर ने पूर्व में प्रकाशित खबरों के माध्यम से बिना बीमा-फिटनेस के निजी स्कूलों की बसों व अन्य वाहनों के संबंध में प्रशासन, परिवहन, पुलिस विभाग और शिक्षा विभाग को मामले से अवगत कराया।

राज्य मानवाधिकार आयोग ने लिया प्रसंज्ञान
प्रदेश में स्कूली वाहनो को लापरवाही और पुराने अनफिट वाहनों के उपयोग से लगातार हो रही दुर्घटना पर राज्य मानवाधिकार आयोग द्वारा प्रसंज्ञान लेते हुए परिवहन और पुलिस विभाग को नोटिस दिया।
राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जी.के.व्यास ने नोटिस में बताया कि प्रदेश में लगातार स्कूली वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने से बच्चों की मौत हो रही है। पोकरण के करीब गांव में जैतपुरा फांटा के पास बिना फिटनेस और परमिट के दौड़ रही स्कूल की बस पलट गई और हादसे में 2 बच्चों की जान चली गई और 30 से अधिक बच्चे घायल हुए। अधिक गंभीर घायल बच्चों को जोधपुर हॉस्पिटल रेफर कि या गया।
राज्य मानवाधिकार आयोग ने कहा कि स्कूली वाहनों और बसों को लापरवाही से चलाने व पुराने वाहनों को स्कूली वाहन के रूप में उपयोग में लेने से दुर्घटना के कई मामले लगातार सामने आ रहे हैं। आयोग ने इस संबंध में परिवहन और पुलिस विभाग से जवाब तलब किए है।
अभिभावकों में जागरूक ता की कमी
स्कूली वाहनों की लापरवाही और अनफिट वाहनों के उपयोग से लगातार हो रही दुर्घटना से अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति अभिभावक बड़ी लापरवाही करते नजर आते है। अभिभावक केवल अपने बच्चों की पढ़ाई तक ही सीमित रह गए है।
दिखावटी और वास्तविकता में अंतर
जिले के कुछ निजी स्कूलों को छोड दें तो ज्यादातर स्कूली वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होता है। वाहनों में क्षमता से ज्यादा यानी बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जाता है। हर साल जिले में प्राइवेट स्कूलों की संख्या में वृद्धि हो रही है। स्कूल खोलते समय बच्चों की सुरक्षा के लिए आश्वस्त किया जाता है। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूलों के हवाले कर देते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा का ख्याल नहीं रखा जाता है। वाहनों में बच्चों को भेड-बकरियों की तरह बैठाकर स्कूलों तक पहुंचाया जाता है। बच्चों को स्कूल वाहन के अंदर क्या दिक्कत है, इसकी जानकारी अभिभावकों को नहीं मिल पाती है । जब कोई बच्चा अपने अभिभावक से इसकी शिकायत करता है, तभी उन्हें पता चलता है। ऐसी ही छोटी-छोटी लापरवाही बडे हादसों का सबब बन जाती है। अभिभावकों को आकर्षित करने के लिए कुछ निजी विद्यालय अपनी कमियों को उजागर ना करके केवल स्कूल के प्रति आकर्षित करने की कोशिश करते रहते है। अभिभावकों से स्कूल वाहन के नाम पर हजारों रूपए की शुल्क वसूलने वाले इन निजी विद्यालयों में चलने वाले स्कूली वाहन जिनमें मैजिक, टैक्सी, टेम्पो ओर बसें आदि से बच्चों को लाया-ले जाया जाता है।
लेकिन क्या आपके बच्चें को वास्तविक स्कूल वाहन सुविधा मिल रही है? वाहन सुविधा के नाम पर मात्र ढोंग किया जाता है। क्योंकि उनका केवल एक मात्र लक्ष्य होता है अधिक से अधिक पैसा कमाना।
परिवहन-पुलिस विभाग
परिवहन और पुलिस विभाग तो हेलमेट वालों के पीछे हाथ धोकर पड रहतेे हैं। 3 सवारी जहां दिखी कि पहुंचे रसीद काटने। सामने से कार या बिना हेलमेट पहने दिखे मोटर साइकिल सवार, फट से चालान। ये तो गनीमत है कि पैदल या साइकल वालों पर हेलमेट की पाबंदी नहीं है, वरना इनका भी चालन कट जाए। इन विभागों को क्या लेना-देना स्कूल बसों से? इनकी अनदेखी की वजह से जिले में कई निजी स्कूलों मेें अनफिट वाहन धडल्ले से बच्चों को असुरक्षित सफर करवा रहें है।
किसी का भी नुकसान हो, हमें क्या लेना-देना? सावधान…! किसी दिन ‘हमारा भी नुकसान हो सकता है। उस नुकसान की भरपाई किसी भी तरह के भ्रष्टाचार, लापरवाही से नहीं हो सकेगी। इसलिए परिवहन व पुलिस विभाग को चाहिए की जिले में शुरू होने वाले निजी विद्यालयों के स्कूल वाहन को सत्र के पहले 15 दिनों में फिटनेस, इंश्योरेंस और टैक्स की जांच कर लें, वरना इन असुरक्षित वाहनों में बैठे स्कूली बच्चें कही बडे हादसे का शिकार ना हो जाएं।
परिवहन विभाग का दांवा, शत प्रतिशत फिटनेस
सिरोही मिरर समाचार द्वारा जब परिवहन अधिकारी सिरोही को स्कूली वाहनों के इश्योरेंस व फिटनेस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सात दिन के शिविर में प्रत्येक स्कूल में जाकर संस्था प्रधान को नोटिस देकर सभी बसों का फिटनेस किया गया है कोरोना की वजह से जो वाहन नहीं चल रहे है उनके संस्था प्रधान को सूचित किया है कि बिना इश्योरेंस व फिटनेस के वाहिनों को चलाने पर उचित कार्रवाही की जाएगी।

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